दिल में अरमान तो लाखों हैं,पूरे मगर ये होते नहीं
हँसते हैं साथ सब खुशियों में,ग़म में मगर संग रोते नहीं।

सोचा था इस बार उनको भूल जाएंगे,
देखकर भी उनको अनदेखा कर जाएंगे।
पर जब जब सामने आया चेहरा उनका,
सोचा इस बार देख ले अगली बार भूल जाएंगे।।

खता मुझसे हुई तो है,जो तुझपे प्यार आया है।
कि सी पत्थर की खातिर हो,ये दिल अपना रू लाया है ।

सोचता हूं जब तेरे बारे में, तेरी तस्वीर नजर आती है।
करता हूं तुझे भूलने की कोशिश, लेकिन कमबख्त तेरी याद आती है।।

हर नजर को तुम चाहते हो, चाहत क्या होती है समझाओं हमे ॥
हम तो बेवफा हैं सागर, वफा क्या होती है समझाओं हमे ॥

वफा माथे पर लट लहराती है, चूड़ी की खनक बुलाती है ।
रुखसारों पे है हया न का पर्दा, चाहत फिर भी उसे सताती है ।

लोग कहते हैं हमें आदत है मुस्कुराने की,
मगर वह क्या जाने यह अदा है गम छुपाने की।।

मेरी तरह सितारों से,कहा उसने भी कु छ होगा
अके ला मैं नहीं रोता,सहा उसने भी कु छ होगा।

मैंने कल शब चाहतों की सब किताबें फाड़ दीं,
सिर्फ़ इक काग़ज़ पे लिक्खा लफ़्ज़ माँ रहने दिया !

इंकार वो करते हैं इकरार के लिए,
नफरत भी करते हैं प्यार के लिए।
उल्टी चाल चलते हैं इश्क करने वाले,
आंखें बंद करते हैं दीदार के लिए।।

अब अँधेरा मुस्तक़िल रहता है इस देहलीज़ पर,
जो हमारी मुन्तज़िर रहती थी आँखें बुझ गईं |

चंद लम्हों की जिंदगी है,
नफरत से जिया नहीं करते।
लगता है दुश्मनों से गुजारिश करनी पड़ेगी,
आप तो अब याद किया नहीं करते।।

आंखों में अरमान लिए फिरते हैं,
हम सबकी नींद चुरा लिया करते हैं।
अब से जब जब आपकी पलक झपकगी,
समझ लेना तब तब हम आपकी याद किया करते हैं।।

वो देता राम रहा मुझको, न जिद मैंने भी छोड़ी है
कमा कर राम की ये दौलत, यूं भर रखी तिजौरी है ।

ज़रा सी आहट होती है, तो तेरा ख्याल आता है
ज़रा मुझको भी बतलाना, कि कै सा भूला जाता है ।

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